घर पर भोग अर्पण करने की सरल विधि (How to make a bhoga offering)

भोग अर्पण करने के लिए तीन मंत्र क्रम से जपें

(1) गुरु प्रणाम — श्रील प्रभुपाद को

नमः ॐ विष्णु-पादाय कृष्ण-प्रेष्ठाय भू-तले
श्रीमते भक्तिवेदान्त-स्वामिन इति नामिने

 (2) श्री चैतन्य महाप्रभु को

नमो महा-वदान्याय कृष्ण-प्रेम-प्रदाय ते
कृष्णाय कृष्ण-चैतन्य-नाम्ने गौर-त्विषे नमः

 (3) भगवान श्रीकृष्ण को

नमो ब्राह्मण्य-देवाय गो-ब्राह्मण-हिताय च
जगद्धिताय कृष्णाय गोविन्दाय नमो नमः

भोग अर्पण करना भक्ति का एक पवित्र कार्य है, जिसमें भोजन पहले भगवान को अर्पित किया जाता है और फिर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। भगवान भोजन से अधिक भक्त की भावना और प्रेम को स्वीकार करते हैं।

भोग की तैयारी

  • भोजन शुद्ध भाव से बनाएं और बनाते समय चखें नहीं।

  • भगवान के लिए अलग और स्वच्छ थाली में भोजन परोसें।

  • थाली को श्रीकृष्ण, श्री चैतन्य महाप्रभु या श्रील प्रभुपाद के चित्र/विग्रह के सामने रखें।

  • हाथ जोड़कर आदरपूर्वक खड़े हों या बैठें।

श्रील प्रभुपाद को प्रणाम (3 बार)

सेवा की अनुमति और आशीर्वाद के लिए गुरु को प्रणाम करें।

नमः ॐ विष्णु-पादाय कृष्ण-प्रेष्ठाय भू-तले
श्रीमते भक्तिवेदान्त-स्वामिन इति नामिने

नमस्ते सारस्वते देवे गौर-वाणी-प्रचारिणे
निर्विशेष-शून्यवादि-पाश्चात्य-देश-तारिणे

श्री चैतन्य महाप्रभु से प्रार्थना

भगवान की कृपा के लिए यह मंत्र जपें।

नमो महा-वदान्याय कृष्ण-प्रेम-प्रदाय ते
कृष्णाय कृष्ण-चैतन्य-नाम्ने गौर-त्विषे नमः

भगवान श्रीकृष्ण को भोग अर्पण

अब सीधे भगवान कृष्ण को भोग अर्पित करें।

नमो ब्राह्मण्य-देवाय गो-ब्राह्मण-हिताय च
जगद्धिताय कृष्णाय गोविन्दाय नमो नमः

  • लगभग 5 मिनट तक भोग को बिना छुए रहने दें।

  • मन में प्रार्थना करें कि भगवान भोग स्वीकार करें।

महत्वपूर्ण बातें

  • खाना बनाते समय चखना नहीं चाहिए।

  • भगवान की थाली अलग और पवित्र रखें।

  • साधारण भोजन भी प्रेम से अर्पित किया जाए तो भगवान स्वीकार करते हैं।

  • नियमित रूप से भोग अर्पण करने की आदत बनाएं।

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